अपनी दारू, अपना गाना, मीडिया क्यों ढूंढ रहा बहाना

तीन दिवसीय राजकीय शोक में सिर्फ सरकारी कार्यक्रमों को रोकने के आदेश थे, निजी कार्यक्रमों के नहीं।

सोशल मीडिया व प्रिंट मीडिया समाज का आईना है। परन्तु किन्हीं भी निजी चीजों को कैमरे में कैप्चर करके, उसे सोशल मीडिया में शेयर करके सामाजिक रूप देना सरासर गलत है। यह भी कहा जा सकता है कि कई मीडियाकर्मियों को बेवजह दूसरों की निजी जिन्दगी में झांकने की आदत पड़ गयी है। 08 जून 2019 की रात वन विभाग के एक उच्च अधिकारी के साथ भी कुछ इसी तरह का मामला सामने आया है। पता चला है कि 08 जून 2019 की रात उस अधिकारी के सहपाठियों ने एक पार्टी का आयोजन किया हुआ था। उस अधिकारी को पहले से ही विशिष्ट तौर पर आमंत्रित किया गया था। निजी तौर पर की गयी इस पार्टी में उस अधिकारी ने अपने सहपाठियों की जिद पर एक गाना भी गाया। जिसको कुछ मीडियाकर्मियों ने गलत ढंग से प्रदर्शित किया और सोशल मीडिया में वायरल किया। इसे उक्त अधिकारी की छवि को धूमिल करने का प्रयास भी कहा सकता है।

बहरहाल, किसी भी व्यक्ति के द्वारा निजी तौर पर की गयी पार्टी को समाज से जोड़ना तथ्यहीन है। यदि कोई भी अधिकारी किसी निजी पार्टी का आमंत्रण भी स्वीकार करता है तो उसे भी गलत नहीं कहा जा सकता है। अगर कोई भी व्यक्ति, जो सरकारी अधिकारी या गैर सरकारी संस्थान से जुड़ा हो। यदि वह अपने रिश्तेदारों अथवा सहपाठियों द्वारा निजी तौर पर की गयी पार्टी में सम्मिलित होता है तो यह बात आपत्तिजनक नहीं है। तीन दिवसीय राजकीय शोक के अनुसार, इन तीन दिनों हमारा राष्ट्रीय ध्वज झुका रहेगा। इन तीन दिनों तक सरकारी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा। कोई भी मंत्री, विधायक, सरकारी कर्मचारी, अधिकारी के द्वारा भी कोई भी सरकारी कार्यक्रम नहीं किया जायेगा। साथ ही सरकारी योजनाओं अथवा सरकार से संबंधित कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जायेगा। यहां सिर्फ सरकारी कार्यक्रमों की मनाही थी, निजी कार्यक्रमों की नहीं।

वहीं, सोचने वाली यह बात है कि यदि इन तीन दिवसीय राजकीय शोक के दौरान किसी भी मंत्री, विधायक, सरकारी कर्मचारी, अधिकारी के पुत्र/पुत्री अथवा किसी भी रिश्तेदार की शादी फिक्स हो, तो क्या उसे भी नहीं मनाया जाएगा। क्या कोई भी अधिकारी ऐसे कार्यक्रमों में सम्मिलित नहीं हो सकता है। क्या मीडिया इन कार्यक्रमों को भी गलत तरीके से सोशल मीडिया में प्रदर्शित करके बेरंग चोला पहनायेगा। अंततः यह कहना गलत नहीं है कि मीडिया के कुछ लोगों ने मीडिया को दागदार बनाने का कार्य किया है। पार्टी के वीडियो को गलत रूप देने और वन अधिकारी की छवि पर दाग लगाने का प्रयास किया है। किसी की निजता में दखल देना और निजी जीवन को सामाजिक चोला पहनाना निंदनीय है। ‘‘उत्तराखण्ड मिरर’’ उन मीडियाकर्मियों से सहमत नहीं है, जो इस तरह के निंदनीय कार्य करते हों।

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