भुवन बिष्ट को आंचलिक साहित्य भूषण सम्मान

(उत्तराखण्ड मिरर)

रानीखेत। रानीखेत मौना निवासी रचनाकार भुवन बिष्ट को मीन साहित्य एवं संस्कृति मंच एंव शैली साहित्य मंच हरियाणा द्वारा आंचलिक साहित्य भूषण सम्मान प्रदान किया गया है। आंचलिक भाषा में लेखन के लिए यह सम्मान संस्था की संस्थापक डा. मीना कुमारी सोलंकी संरक्षक एल आर सेजु थोब, व अजीत सिंह प्रजापति की ओर से प्रदान किया गया है।

भुवन बिष्ट को इसी माह राजल वेलफेयर एंड डेवलपमेंट संस्थान जोधपुर द्वारा केसरी सिंह बारहठ सम्मान 2019,राष्ट्रीय शिव शक्ति कला उन्नयन मंच बाराबंकी द्वारा दिनकर सम्मान, सरित काव्य सरिता प्रवाह साहित्य मंच द्वारा साहित्य सम्मान, विश्व जनचेतना साहित्य ट्रस्ट द्वारा उन्मुक्त सम्मान भी प्रदान किये गये हैं।

अर्णव कलश ऐसोसिएशन के राष्ट्रीय मिशन आंचलिक साहित्य संस्थान झज्झर हरियाणा द्वारा आंचलिक भाषा कुमांऊनी में रचनाओं,आलेखों के लेखन व निरंतर साहित्य योगदान के लिए आंचलिक इन्द्रा स्वप्न साहित्य सारथी सम्मान 2019 भी प्रदान किया जा चुका है। इससे पूर्व राष्ट्रीय शिव शक्ति कला उन्नयन मंच द्वारा सोंधी माटी काव्य दिग्गज सम्मान व राजल वेलफेयर सोसाईटी द्वारा साहित्य सारथी सम्मान 2019 भी प्रदान किया गया है।

इससे पूर्व सौहार्द भूषण सम्मान ,काव्य दिग्गज अलंकरण सम्मान, रामेश्वर दयाल दुबे साहित्य सम्मान, प्रह्लाद अनुराग सम्मान भी साहित्यिक संस्थाओं द्वारा प्रदान किये गये है। रचनाकार भुवन बिष्ट विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में हिन्दी व कुमांऊनी में निरंन्तर रचनाओं व आलेखों का लेखन कर रहे हैं तथा कुमाँऊनी बाल कविता संग्रह निकल रै प्रभातफेरी व कविता संग्रह जीवन एक संघर्ष प्रकाशित हो चुके हैं ।

रचनाकार भुवन बिष्ट को इसी वर्ष पत्रिका स्टार हिंदी ब्लाग द्वारा स्टार हिंदी साहित्यकार सम्मान 2019 ,कवि चौपाल मनीषी सम्मान 2019,साहित्य कलम सम्मान2019, मधुशाला साहित्य संस्था द्वारा साहित्य श्री सम्मान 2019,कविता बहार साहित्य सम्मान तथा अर्णव कलश ऐसोसिएशन राष्ट्रीय साहित्य मिशन द्वारा चौपाई शतकवीर सम्मान 2019 व भावो के मोती साहित्य समूह द्वारा श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान 2019,नवयौवन साहित्य कलम सम्मान 2019 व भारत विभूति सम्मान भी प्रदान किये गये हैं।

इससे पूर्व भी अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा भुवन बिष्ट को सम्मान प्रदान किये गये हैं। भुवन बिष्ट अनेक प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में भी निरन्तर लेख व कविताओं का लेखन हिन्दी व कुमांऊनी में कर रहे हैं।

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