तुम शिव हो

मनु श्वेता, मुज़फ्फरनगर

तुम शिव हो
तुम सुंदर हो
सत्य हो,
शाश्वत हो
सबके प्राणाधार हो।
तुम वंदनीय
तुम पूजनीय
तुम सन्यासी
तुम ही संहारक हो।
तुम चेतन
तुम अवचेतन
तुम नीलकंठ हो
तुम ही अविनाशी हो।
तुम लौकिक
तुम अलौकिक
कण कण में विराजमान हो।
तुम चंद्रमौलि
तुम औघड़दानी
तुम ही अर्धनारीश्वर हो।
तुम भयंकर
तुम प्रलयंकर
तुम सत्य सनातन हो।
तुम गंगाधर
तुम गणनायक
तुम ही महेश्वर हो।
तुम शूलपाणि
तुम सर्वेश्वर
तुम ही मृत्युंजय हो
तुम शिवाप्रिय
तुम विरुपाक्ष
तुम ही बाघम्बरधारी हो।
तुम जन जन में
जन जन तुममे
तुम सर्वमंगलकारी हो।
हम मूर्ख
हम अधम स्वामी
तुम हम सबके रखवाले हो

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