जल में जीवन

राजपूत गोकुल मौरा, शिक्षक, कविता लेखक
गंगोलीहाट, पिथौरागढ़

हम सब कहते बारंबार हैं।
जल जीवन का आधार है।
वृक्ष लगाकर बच जाएगा।
काटोगे तो सूख जायेगा।

वृक्ष रोपकर जल बचाओ।
आओ अपना फर्ज निभाओ।
अपने भावी जीवन को सब,
भारी जल सूखे से बजाओ।

आओ हम सब मिलकर पूरे,
जल स्रोतों का संरक्षण करें।
भावी पीढ़ी को अपने हम,
सब जल संकट से बचाएँ।

जल ही जीवन है। इस भाव,
को सब मिलकर साकार करो।
नील गगन के तले जी कर,
अपने कर्तव्य का निर्वाह करो।

One thought on “जल में जीवन

  • September 11, 2019 at 2:35 pm
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    अति उत्तम सृजन सर
    हार्दिक बधाई

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