मानवता का पुनर्जन्म

राजकुमार जैन राजन, चित्तौड़गढ़, राजस्थान

आत्मा के अंधेरे कौनों में
चेतना की लौ
कहीं धुंधली हो गई है

मंदिर में बज़ते
ताल मजीरे के स्वर
कुछ पीड़ा देने लगे हैं
पत्थर के भगवान भी तो
कुछ देखते – सुनते नहीं
हमें तो जो रिक्त – तिक्त
जीवन मिला है
उसे हम जी रहे हैं
और कभी आँसू
कभी धुँआ पी रहे हैं

धर्म, नीति, आदर्श, आस्था
प्रेम और प्रेरणा
खोखले शब्द हे मात्र हमारे लिए
जो गूंजते है यदा -कदा
मन के सुने खंडहरों में
समाज की उझाड़ घाटियों ने
राजनीति के बीहड़ जंगलों में
पर इनसे मिलता नहीं
कोई अर्थ, कोई हुलास
सिर्फ एक स्वार्थी आवाज़
जो हमें बना देती है उदास

आंखों में उभर आता है
महाभारत का एक चित्र
कुरुक्षेत्र, युद्ध, चक्रव्यूह
और अभिमन्यू का अंत
आज भी जिंदा है
कई अभिमन्यू
जो हर लड़ाई
अकेले ही लड़ते हैं
व्यूह भेदते हैं और
असमय ही मर जस्ते हैं
पर
यह हमारा आत्म हनन नहीं
चिंतन – मनन है

निर्वासित कर दिया गया है जो
अनुत्तरित प्रश्न
वही जागरण की भोर बन
उभरता है
फूल बन खिल जाता है
सूरज बन चमकता
मानवता का जैसे
हो गया हो पुनर्जन्म।

8 thoughts on “मानवता का पुनर्जन्म

    • August 11, 2019 at 9:02 pm
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      बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

      मानवता जो कहीं छिप गयी थी अंधेरों में आज रौशनी की किरण देख फिर से जीना चाहती है

      Reply
  • August 11, 2019 at 2:20 pm
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    उम्दा रचना हेतु हार्दिक बधाई

    Reply
  • August 11, 2019 at 3:30 pm
    Permalink

    Rajkumar Jain Rajan जी की यह कविता बहुत भावपूर्ण है। इसलिए यह भावपूर्णता, वर्तमान के लिए उचित है। बहुत आकर्षक एवं सुन्दर शब्दों से लिखी हुई इस कविता में एक अद्भुत सुन्दरता देखती हूँ, मैं ।
    आदरणीय राजकुमार जैन राजन जी। मेरी हार्दिक बधाइयां एवं शुभकामनाएं।

    Reply
  • August 12, 2019 at 10:08 am
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    बहुत सुंदर विचार

    Reply
  • August 12, 2019 at 11:15 am
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    मानवता का पुनर्जन्म सूरज की भांति हो ऎसा कवि चाहते हैं लेकिन आज की दुनिया में और परिस्थित मे भगवान करे मानवता पूरी दुनिया में जन्मे,
    कवि के ऎसे ह्रदय स्पर्शी और मानवीय मूल्यों के उत्थान के लिए हमेशा चिंतित रहते हैं ऎसे उम्दा कवि, साहित्य जगत में सम्मानित श्री राज कुमार जैन राजन जी को ह्रदय से हार्दिक बधाई देते हुए गौरव महसूस करते हैं

    Reply
  • August 13, 2019 at 6:15 pm
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    “मानवता का पुनर्जन्म” यह कविता मानवतावादी विचारों को व्यक्त करती है; जिसमें हताशा न होकर एक नई ऊर्जा एवं प्रेरणा परिलक्षित है; जो समाज को दिशा निर्देश करने में उपादेय सिद्ध होगी। इस कविता में समकालीन समाज की विडंबना को उकेरा गया है; साथ ही मानवतावादी नैतिक विचारों के सच्चे अर्थ को समझने के लिए भी सचेत एवं प्रेरित किया गया है।

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