नया उत्कर्ष

राजकुमार जैन राजन, आकोला, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

मेरी आँखों में
उतर आया है एक चाँद
व्यस्तताओं के बावजूद
यादों के मौसम को तलाशते
जीवन की जगह जलन
और प्रगति की जगह
भटकन ढ़ोता हुआ

जिंदगी देने की कोशिश में
इतने मिले ज़ख्म कि
रिसते है घाव आज भी
अरसा बीत गया
संवेदनाएं चुप हो गई
अभिव्यक्ति भी मौन हो
बिखर गई
अपनापन सब खो गया
डरा-डरा सा अंतर्मन
सिहर उठता है बार- बार

बहुत दिनों बाद
मेरी जीजिविषा ने
मेरे उगते हुए सपनों के
अहसास को छुआ
मन के समंदर में
आशा की पतवार थामें
गंतव्य तक पहुंचने की चाह में
अपने अस्तित्व को खोजता
बढ़ चला

रिसते हुए घाव
मेरी तरफ देखकर मुस्कराए
संवेदनाएं चेतन हो उठी
सुख गया था जो दुःख का बिरवा
बहुत दिनों बाद
फिर हरियल होने लगा
हौसलों की सर्थक हवा
और मेहनत की दिशा पाकर

विश्वास बांहें फैलाकर
स्वागत कर रहा
फिर नये उत्कर्ष का!

19 thoughts on “नया उत्कर्ष

  • February 15, 2019 at 1:51 pm
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    बहुत सुन्दर सटिक शब्दभाव 👌
    हार्दिक बधाई एवम् ढेरौं शुभकामनाएं 🌺🌺

    Reply
  • February 15, 2019 at 3:59 pm
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    बहुत बढ़िया।
    नमन लेखनी।

    Reply
  • February 15, 2019 at 4:20 pm
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    सुन्दर अभिव्यक्ति!!!
    नीलम राकेश

    Reply
  • February 15, 2019 at 4:22 pm
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    वाह सुन्दर!!

    Reply
  • February 15, 2019 at 6:00 pm
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    बेहद खूबसूरत रचना!!
    आपकी रचनाओं में शब्दों की गाम्भीर्यता,आपके व्यक्तित्व को परिभाषित करती है, बड़ा अच्छा लगता है आपको पढ़कर
    अनन्त शुभकामनाएं राजन सर!!
    💐

    Reply
  • February 15, 2019 at 7:01 pm
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    बहुत ही सुंदर सृजन आदरणीय
    सर्थक या सार्थक ।

    Reply
  • August 13, 2019 at 7:16 pm
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    जैन जी ! आपकी कविता मानव में संवेदना जगाने का भाव जगाती है। जिसमें दुखों के आघातों को लड़ने एवं जीवन में नए उत्साह के साथ आगे बढ़ने का संकेत है।

    Reply
  • August 17, 2019 at 9:46 pm
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    जी सर ने उत्कर्ष का स्वागत! प्रेरणादायक कविता
    🙏🏻🙏🏻

    Reply
  • August 17, 2019 at 9:46 pm
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    भावयुक्त सुंदर रचना।

    Reply
  • August 17, 2019 at 10:18 pm
    Permalink

    बहुत ही सुंदर सार गर्भित रचना नमन आपकी लेखनी को राजन सर

    Reply
  • August 18, 2019 at 10:54 am
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    सार्थक और भावयुक्त रचना के लिए हार्दिक बधाई ।

    Reply
  • August 18, 2019 at 11:59 am
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    विश्वास बांहें फैलाकर स्वागत कर रहा नए उत्कर्ष का ! बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति । हार्दिक बधाई आपको भाई साहब !

    Reply
  • August 18, 2019 at 1:07 pm
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    बहुत ही सुन्दर और मार्मिक यांग चांद के उदाहरण से और अंत में सुझाव मेहनत करेंगे तो होगा उत्कर्ष, इसी उम्दा रचना के लिए हार्दिक बधाई राजन जी

    Reply
  • August 18, 2019 at 7:20 pm
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    सकारात्मक रचना।बढ़िया

    Reply
  • August 18, 2019 at 7:57 pm
    Permalink

    बधाई जी !!!
    विश्वास बांहें फैलाकर
    स्वागत कर रहा
    फिर नये उत्कर्ष का!

    निराश जीवन में आशा की लौ कायम रखने की प्रेरणा देने वाली रचना ! बहुत सुंदर! बालसाहित्यकार होते हुए भी प्रौढ़ साहित्य में भी आपकी कलम सटीक चलती है ! पुनश्च बधाई ! बहुत मंगलकामनाएँ !!!

    Reply
  • August 18, 2019 at 10:04 pm
    Permalink

    सार्थक और भावयुक्त रचना के लिए हार्दिक बधाई ।

    Reply

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