भारत मां तुझे ना भूलूंगा

रावत गर्ग उण्डू (नायब सुबेदार, सीसुब)
बाड़मेर, राजस्थान

मैं जग भूलूँगा लेकिन, माँ फर्ज कभी न भूलूँगा।
मरकर भी में आऊँगा, तेरा कर्ज कभी न भूलूँगा।।

बेशक मुझको याद है आती अपनी माँ की वो लोरी।
माँ के चरणों से बँधी है, वो ममता की एक डोरी।।

फिर भी मेरी भारत माँ, तेरी रक्षा में मर जाऊँगा।
जो बेटे तूने खोये माँ, वो दर्द कभी न भूलूँगा।।

जिस पर मरता हूँ दिल से, मेरे गाँव की वो एक छोरी।
मुझ पर भी जो मरती है, मुझे याद वो आती है गोरी।।

यादों के साये में मै, मर-मर कर फिर जी लूँगा।
वो सर्दी में आती मिलने, शवो सर्द कभी न भूलूँगा।।

सरहद पर जब जंग छिड़ी, हो गया हूँ माँ टुकड़े-टुकड़े।
सही सलामत नही हुँ माँ, हो गया हूँ मै चिथड़े-चिथड़े।।

लिपट तिरंगे में मै आया, कुछ अंग है जो शेष है माँ।
मातृभूमि में जन्म लिया, वो कर्ज कभी न भूलूँगा।।

तू मत रोना शोक न करना, मेरी माँ तू है भोली।
वतन की रक्षा में, मिटती है माँ के लालो की टोली।।

“रावत” फाँसी पर जो झूल गए, वो भी बेटे थे माँ तेरे।
चंद्र शेखर, और भगत सिंह, वो मर्द कभी न भूलूँगा।।

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