काजल और कलम

सोना मौर्या, देवरिया

अधूरे पड़े मेरे किस्सों को
बिखरे से मेरे प्रेम को…
काजल और कलम सवांरने लगे है…
दोनों मिलकर मेरा व्यक्तित्व निखारने लगे है…!!
ये रूप ये यौवन,और हाथ में कलम..
लोगो को अब खलने लगे है….
काजल और कलम सवांरने लगे है…
दोनों मिलकर मेरा व्यक्तित्व निखारने लगे है..!!
सुनी पड़ी आँखों को सजाने लगे है..
खाली से अल्फाजो को कलम मेरे भरने लगे है…
काजल और कलम सवांरने लगे है…
दोनों मिलकर मेरा व्यक्तिव निखारने लगे है..!!
जिंदगी की सुनी राहों में,
सुरमई प्रेम लिए मुझे वो पढ़ने लगे है…
काजल और कलम मुझे सवांरने लगे है…
दोनों मिलकर मेरा रूप निखारने लगे है..!!

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