ज्ञान का दीप जलाते हैं

शिक्षक दिवस पर विशेष

भुवन बिष्ट, रानीखेत (अल्मोड़ा)

मेरे भारत के युग निर्माता,
हम ज्ञान का दीप जलाते हैं।
भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं,
भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं ।।
जग में फैला अंधियारा,
मिलकर हमें आज मिटाना है।
विश्व गुरू भारत बन जाये,
यह करके दिखलाना है।।
कत्वर्यों को सदा निभायें,
झलक यह दिखलाते हैं।
भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं,
भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं ।।
मेरे भारत के युग निर्माता,
हम ज्ञान का दीप जलाते हैं।
ज्ञान के दानी कहलाते हम,
दान कभी ना लेते हैं।
सच के राही बने हुए,
हम स्वाभिमान से जीते हैं।
गुरू की महिमा का देखो,
होता नित नित गुणगान यहाँ।
जहाँ गुरू कृपा हो जाये,
मिटता है अज्ञान वहाँ।।
पथ प्रदर्शक की कृपा से,
मंजिल सभी पा जाते हैं।।
भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं,
भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं ।।
मेरे भारत के युग निर्माता,
हम ज्ञान का दीप जलाते हैं।
अन्तः मन की जगे चेतना,
कर दो ज्ञान का अब संचार।
मानवता का दीप जले अब,
ज्ञान का तुम भर दो भंडार।
शिक्षा सबको मिल जाये,
अब ऐसी ज्योति जलाते हैं।।
भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं,
भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं ।।
मेरे भारत के युग निर्माता,
हम ज्ञान का दीप जलाते हैं।
नई सोच व नई उमंग से,
नव युग का निर्माण करें।
संस्कारों का सबके मन में,
आओ अब परित्राण करें।
शिक्षा की कल्पना जो करते,
उसको हम साकार करें।
ज्ञान पुंज हम बन जायें यह,
पावन धर्म निभाते हैं।।
भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं,
भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं ।।
मेरे भारत के युग निर्माता,
हम ज्ञान का दीप जलाते हैं।

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