हास्य कविता : कार्टून नगरिया में बंकु भैया

विनोद कुमार विक्की

कार्टून शहर में बंकु भैया
पहुँचे दशहरा के दिन।
स्वागत किया वहाँ पर उनका
आंख नचाकर मिस्टर बीन।।
रावण-दहन को आॅगी और कॉकरोच ने
लाई थी मोमबत्ती ।
गरम समोसे से जली हुई थी
मोटू के खाली दिमाग की बत्ती।।

भूल भूलैया घूम रहे थे
घसीटाराम और डाॅ. झटका।
बिजली कट से टाॅम-जेरी का झूला
हवा में सीधा लटका।।

भोलू-ढोलू संग छोटा भीम
खा रहा था गोल गप्पा।
ब्रेक डांस में झूम रहे थे
कालिया और नोबिता।।
लड्डू जिलेबी स्वीट्स शाप की ओर
मिकी माउस लपका।
चाट-पकौड़ा देख शिवा के मुंह से
लार टपाटप टपका।।

टोपी चश्मा जींस पहन कर
घूम रहा था मेला मोगली।
बैलून खरीदकर मटक मटक संग
टहल रहा था बगीरा जंगली।।

घड़ी बेच कर बेनटेन ने
खरीदा विडियोगेम।
फुरफुरी नगरिया छोड़ कर
मेला घूम रहे थे इं. चिंगेम।।

मेला में डोरेमोन संग चाट-आइसक्रीम,
छक कर खाए बंकु भैया।
‘जाॅन बनेगा डाॅन जाॅन को रोकेगा कौन’
नम्बर वन नम्बर टू के साथ कर रहा ता ता थैया।।

‘उठो बेटा सुबह हो गई जाना है स्कूल’।
मम्मी की ये बातें सुन कर बंकु की आंखें गई खुल।।
खूब मस्ती, खूब मजा किया कार्टूनों की नगरिया में।
दशहरा मेला घूमकर बंकु लौटे अपनी दुनिया में।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *