बदली मंजिल

राजकुमार जैन राजन
चित्तौड़गढ़, राजस्थान

लिखना चाहूँगा
तुम्हारा इतिहास
अतीत से जुड़े पलों को
कुछ इस तरह पत्थर पर उकेरूँगा
कि तुम आज भी हो
मेरे अहसासों में

मन के रेगिस्तान में
कुरेदे गए मेरे जख्मों को
तुमने ही सिया था प्रेम के धागे
और विश्वास की सुई से
मैं पिघलता रहा पल दर पल
तुम्हारे समर्पण से

तुम्हारे हर सवाल का जवाब
मेरी आंखों में था
और तुम
जमाने भर का दुःख ओढ़े
करती रही इंतज़ार
अपने अस्तित्व बोध में

छन जाता है सुख
समय की छलनी में
साथ चलते- चलते
अचानक तुमने दिशा मोड़ ली
रास्ता बदल लिया
मुझे भ्रमित कर
और मैं व्यथित,
थका हुआ बैठा हूँ
रेगिस्थान- सी चिलचिलाती धूप में

कब तुमने शामियाना उठा लिया
और चलती बनी
न जाने किसे मंजिल मानकर
रास्ता तुमने बदला था
मंज़िल मेरी भटक गई।

59 thoughts on “बदली मंजिल

  • February 8, 2019 at 9:22 pm
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    कविता प्रकाशन के लिए हृदय से आभार

    Reply
    • February 8, 2019 at 10:57 pm
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      सुंदर रचना बधाई

      Reply
    • February 8, 2019 at 11:27 pm
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      आदरणीय राजन जी बहुत सुन्दर रचना हे मन को छू गई आपको आत्मीयता से हार्दिक बधाई व शुभकामनाए ।

      Reply
    • February 9, 2019 at 5:07 am
      Permalink

      बहुत सुन्दर भाव। बेहतरीन रचना ।

      Reply
    • February 9, 2019 at 12:22 pm
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      उम्दा रचना ..मन को छू गयी रचना
      आप इसी तरह रचना लिखते रहे और हम शिद्दत से पढ़ते रहे।

      Reply
  • February 8, 2019 at 9:35 pm
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    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, सर

    Reply
  • February 8, 2019 at 9:37 pm
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    बहुत ही शानदार सृजन आदरणीय

    Reply
  • February 8, 2019 at 9:39 pm
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    सुंदर कविता

    Reply
  • February 8, 2019 at 9:42 pm
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    खूबसूरत है सच्ची

    Reply
  • February 8, 2019 at 9:48 pm
    Permalink

    बहुत सुंदर रचना सर बाल साहित्य पर अक्सर यह आरोप किया जाता है कि वो यथार्थ पर नहीं लिख आपकी रचना बड़े कवियों को चुनौती है सर 🙏🙏🙏

    Reply
  • February 8, 2019 at 9:50 pm
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    बहुत ही सुंदर सृजन आदरणीय

    Reply
  • February 8, 2019 at 9:50 pm
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    सचमुच बेहतरीन कविता
    वाक़ई सच के करीब

    Reply
  • February 8, 2019 at 9:50 pm
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    प्रेम की इबारत दिल की दीवार छोड़कर पत्थरों पर उकेरनी पड़े तो सच वह इतिहास ही बन जाती है , जिसके नसीब में सर्दी , चिलचिलाती धूप और वर्षा के अतिरिक्त कुछ नहीं आता । एक बहुत ही सुंदर भावप्रवण कविता 👌👌👌

    Reply
  • February 8, 2019 at 9:50 pm
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    अति सुंदर रचना, ,,,!!!!!

    Reply
  • February 8, 2019 at 10:10 pm
    Permalink

    💐 स्वागतम् 💐
    सुंदर रचना प्रस्तुति के लिए हार्दिक शुभकामनायें

    Reply
  • February 8, 2019 at 10:12 pm
    Permalink

    राजन सर! आपकी रचना हृदय को छूकर गयी,बहुत ही सुंदर शब्दसंयोजन,बहुत बेहतरीन भाव और शिल्प में सधी रचना ,कुल मिलाकर मुझे बेहद पसंद आयी।
    अनन्त शुभकामनाएं….💐

    Reply
  • February 8, 2019 at 10:22 pm
    Permalink

    बहुत सुंदर और भावपूर्ण रचना भाई साहब । हृदय को छू गई । आपको ढेरों बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं !

    Reply
  • February 8, 2019 at 10:24 pm
    Permalink

    व्यथा, विश्वास व सकारात्मक सोच की सशक्त अभिव्यक्ति, सुंदर शब्द संयोजन व भावपूर्ण शैली की मार्मिक कविता,बधाई बंधुश्री राजन जी

    Reply
  • February 8, 2019 at 10:29 pm
    Permalink

    दिल को छू लेने वाली मार्मिक कविता
    बधाईया लेखक को
    मीरा जैन

    Reply
  • February 8, 2019 at 10:34 pm
    Permalink

    रास्ता तुमने बदला, मंजिल मेरी भटक गई…. बहुत बढ़िया रचना

    Reply
  • February 8, 2019 at 10:41 pm
    Permalink

    बहुत ही सुंदर है आपकी रचना,सुख छन जाता है समय की छलनी में,वाह क्या बात कही है राजन जी आपने।बहुत बहुत बधाइयाँ।
    तारा “प्रीत”

    Reply
  • February 8, 2019 at 10:51 pm
    Permalink

    प्रेम के रेगिस्तान की मृगतृष्णा का सुंदर वर्णन ।

    Reply
  • February 8, 2019 at 10:52 pm
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    मेरे अहसासों में
    बहुत सुंदर आ0
    ☺️☺️☺️☺️☺️

    Reply
  • February 8, 2019 at 10:55 pm
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    सुंदर भावाभिव्यक्ति | बहुत बेहतरीन कविता | बधाई हो आपको |

    Reply
  • February 8, 2019 at 11:01 pm
    Permalink

    बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति । लाजवाब कविता 👌👌👌👌👌

    Reply
  • February 8, 2019 at 11:03 pm
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    बहुत खूब भाई
    आपको तहेदिल से मुबारकबाद पेश हूँ ।

    Reply
  • February 8, 2019 at 11:04 pm
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    सुंदर

    Reply
  • February 8, 2019 at 11:30 pm
    Permalink

    बहुत खूब ! बेहतरीन रचना

    Reply
  • February 8, 2019 at 11:36 pm
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    खूबसूरत रचना

    Reply
  • February 8, 2019 at 11:38 pm
    Permalink

    रास्ता तुमने बदला
    मंजिल मेरी बदल गई…

    मन की दिवारों पर खूबसूरती से अपनी छाप छोड़ती कविता…
    बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं राजन जी!!!

    Reply
  • February 9, 2019 at 1:17 am
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    बहुत सुंदर हृदय स्पर्शी रचना ।
    हार्दिक शुभकामनाएं।

    Reply
  • February 9, 2019 at 5:08 am
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    बहुत सुन्दर भाव। बेहतरीन रचना ।

    Reply
  • February 9, 2019 at 6:01 am
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    बहुत सुन्दर रचना
    यौवन यादें ताजा कर दी

    Reply
  • February 9, 2019 at 7:25 am
    Permalink

    आदरणीय राजकुमार जैन राजन के अंतर भाव का सुंदर संयोजन । हार्दिक बधाई शानदार कविता के लिए।

    Reply
  • February 9, 2019 at 8:37 am
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    बेहद भावपूर्ण, गहराई लिए हुए, सलीक़े से पिरोए गए अर्थपूर्ण शब्द।
    हार्दिक बधाई

    Reply
  • February 9, 2019 at 9:19 am
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    बहुत ही सुंदर, भावपूर्ण अभिव्यक्ति सर

    Reply
  • February 9, 2019 at 9:23 am
    Permalink

    बहुत सुन्दर, सुललित एवं मार्मिक भाव!

    Reply
  • February 9, 2019 at 9:37 am
    Permalink

    वाह खूबसूरत रचना

    Reply
  • February 9, 2019 at 3:43 pm
    Permalink

    बहुत सुंदर भावपूर्ण कविता राजन जी।

    Reply
  • February 9, 2019 at 4:56 pm
    Permalink

    बहुत सुंदर रचना सर जी

    Reply
  • February 9, 2019 at 5:31 pm
    Permalink

    अत्तिसुंदर, भावपूर्ण अभिव्यक्ति से परिपूर्ण रचना।
    अशेष बधाई सर

    Reply
  • February 10, 2019 at 9:46 am
    Permalink

    सुन्दर रचना । बधाई ।

    Reply
  • February 12, 2019 at 10:53 am
    Permalink

    बहुत खूब लिखा है साधुवाद

    Reply
  • February 14, 2019 at 1:24 pm
    Permalink

    सुंदर रचना

    Reply
  • August 13, 2019 at 9:52 am
    Permalink

    बहुत ही सुंदर, भावपूर्ण रचना!

    Reply
  • August 13, 2019 at 9:55 am
    Permalink

    उम्दा

    Reply
  • August 13, 2019 at 9:58 am
    Permalink

    बहुत अच्छा सर आपने बहुत अच्छी रचना निर्मित की भौतिकता की चकाचौंध में आज इस प्रकार की रचना करना आम बात नहीं है आपने चित्तौड़गढ़ की वीर धरा पर जन्म लेकर हम सभी को गौरवान्वित किया बहुत-बहुत साधुवाद

    Reply
  • August 13, 2019 at 10:00 am
    Permalink

    Thanks rajkumaar jainji for such a nice poem…

    Reply
  • August 13, 2019 at 10:01 am
    Permalink

    Thanks rajkumaar jainji for such a nice poem…

    Reply
  • August 13, 2019 at 10:06 am
    Permalink

    सुंदर शब्दो के साथ सुंदर भावव्यंजना कविता ।
    अशेष बधाई,सर

    Reply
  • August 13, 2019 at 2:19 pm
    Permalink

    सुन्दर शब्द , सुन्दर विचार। मन मोहक कर दिया है। बधाइयां आदरणीय राजकुमार जैन राजन जी।

    Reply
  • August 13, 2019 at 4:41 pm
    Permalink

    बदली मंजिल जीवन की नैया कब मंजिल बदल ले उस तरफ इशारा कर रहे हैं क्यू की कुदरत का करिश्मा होता है, समय समय पर जीवन की मंजिल रास्ता बदल लेती है, इस कवि मे एक उम्दा गुण है कि उसकी हर कोई रचना से व्यक्ति को कुछ न कुछ सीखने को मिलता है, राजकुमार राजन साहित्य की एक उम्दा मिशाल हे, उन्हें ह्रदय से हार्दिक बधाई

    Reply
  • August 13, 2019 at 5:26 pm
    Permalink

    सुंदर रचना. प्रेम इतिहास के पन्नों पर तभी छपा है, जब किसी का दिल आहत हुआ हो या प्रेम में खुद को खो दिया हो नहीं तो इतिहास हर किसी का बनता फिर न जाने उसे कौन पढ़ता.
    राजन जी हार्दिक बधाई !!!!

    Reply
  • August 13, 2019 at 5:37 pm
    Permalink

    आपकी कविता ह्रदय के भावों को छू लेती है। जिसमें पीड़ा भी है और प्रेम भी मुखर हुआ है। कवि सुमित्रानंदन पंत भी करते हैं कि ‘वियोगी होगा पहला कवि, आह ! से उपजा होगा गान।…’ वैसी व्यष्टि चेतना की पीड़ा समष्टि रूप में कविता में अंकित हुई है; ऐसा प्रतीत होता है।

    Reply
  • August 17, 2019 at 9:28 pm
    Permalink

    सार्थक रचना सृजन हेतु बधाई ।

    Reply

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