प्रहार

प्रियंका सिंह चौहान

कुछ चीजें जो आपको समाज और शिक्षा से मिलती हैं ,उसके जरिए आप अपना विकास करते हैं ।जिन जिन चीज़ों में आपकी रुचि होती है धीरे- धीरे आप उसको अपने शौख में बदलने लगते हैं। जब आप छोटे होते हैं तो घंटो आप किसी ना किसी के पास समय व्यतीत करते हैं , जिन जिन लोगों की छत्रछाया में आप पले बड़े होते हैं,उनका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव आपके जीवन काल के किसी ना किसी पड़ाव पर दिखता है।

जब आप विद्यार्थी होते हैं विद्यालय में आप अपने पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या के दौरान बहुत से गुणों का विकास करते हैं। लेकिन इन्हीं के बीच एक ऐसा बीज आपके अंदर छुपा होता है, जिसे आप खुद नहीं समझ पाते हैं।उपर की ये रुचियां आपको उस तक पहुंचने ही नहीं देती।उस निहित रुचि का आना इतना सहज भी नहीं होता कि वो हमे आराम से समझ में आजाये।

जिंदगी में जब आपका परिचय दुनिया के लोगों से होता है तो जायज सी बात है अलग अलग अनुभव भी जिंदगी देती है,,,कभी खुशी कभी गम का सिलसिला चलता रहता है ।लेकिन कभी कभी एक ऐसा भी समय आता है जब आपकी भावनाएं आहत होती हैं।उस समय आपको किसी का साथ नहीं चाहिए होता है।कुछ लोग इसी दशा में लगातार रहना पसंद करते हैं जिसकी वजह से डिप्रेशन में चले जाते हैं।

जबकि ऐसी दशा में व्यक्ति के अंदर विध्वंशकारी और सृजनकारी दोनों शक्तियों का वास होता है।लेकिन नकारात्मक शक्तियां इतनी हावी होती हैं कि आपको उस दशा से उठने ही नहीं देंगी आपकी सभी उपलब्धियां आपकी सभी रुचियां आपका साथ छोड़ती हुई नजर आएंगी क्योंकि वो तो सिर्फ दूसरों को खुश करने के लिए आपने सीखा और अर्जित किया था ,,,लेकिन इस समय तो आपकी भावनाएं आहत हुई हैं।संवेदनाओं की लहर इतनी है कि आप अंदर ही अंदर व्याकुल हो रहे हैं।

जब आपकी संवेदनाएं बार बार प्रहार करती रहें तो उसे समझने की जरूरत है एक दिशा देने की जरुरत है क्योंकि यही वो अवसर है जिस समय आपकी भावनात्मक ऊर्जा एकाग्रचित है और आपको एक दिशा देना चाहती है ।सिर्फ इसका प्रहार उस बीज पर करना बाकी है,
मन के अंदर जो बीज छुपा है उसे खोजना बाकी है,उसके मिलते ही आपको ऐसा नहीं लगेगा की आपकी ये उससे पहली मुलाक़ात है क्योंकि चुपके चुपके ये आपसे मिलता भी रहा होगा लेकिन आपने ध्यान और समय दोनों नहीं दिया होगा,ये छुपा खजाना है जिसका आपको सिर्फ उपयोग करना है ।

दुनिया में आए हर एक इंसान के अंदर एक विलक्षण निहित गुण होता है जिसका एहसास कोई और नहीं आपको स्वयं करना है।किसी के अंदर अगर कोई प्रतिभा है तो आप उसको देख कर उस जैसा बनना चाहते हैं अच्छी बात है ,लेकिन ये कभी मत भूलिए की आपके अंदर भी कोई ना कोई प्रतिभा है । बहुत कुछ अलग करने की जरुरत नहीं,बिना द्वेष भाव के जो गुण आपके पास है उसे सबसे अलग बनाने की जरुरत है। पहचानिए अपने आपको और खुद उस गुण के साथ निखरिए।

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