हर देश में पर्यावरण प्रदूषण की समस्या

राजीव डोगरा, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
(भाषा अध्यापक) गवर्नमेंट हाई स्कूल,ठाकुरद्वारा

पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है मगर पर्यावरण दिवस मनाने से कुछ नहीं होता हम हर साल पर्यावरण दिवस मनाते हैं लोगों को जागृत करते हैं मगर फिर भी पर्यावरण प्रदूषण कम होने के स्थान पर दिन प्रतिदिन बढ़ता ही चला जा रहा है,भले जल प्रदूषण हो,वायु प्रदूषण हो,ध्वनि-प्रदूषण हो ,थल प्रदूषण हो इत्यादि कोई भी हो। पर्यावरण प्रदूषण की समस्या सिर्फ भारत में ही नहीं विश्व के हर देश में पाई जा रही है। और जो लगातार बढ़ती ही जा रही है। पर्यावरण प्रदूषण वृद्धि का मुख्य कारण मानव की अवांछित गतिविधियां हैं, जो प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन करते हुए इस पृथ्वी को कूड़े-कचरे का ढेर बना रही है। आने वाले कुछ समय में हवा तथा पानी इतना प्रदूषित हो जाएंगे कि हम ना तो सांस ले सकेंगे और ना ही पाने को पी सकेंगे पर वास्तव में वातावरण को प्रदूषित करने में सबसे बड़ा हाथ हमारा अपना ही है।

वनों की अंधाधुंध कटाई जो हम कर रहे हैं इससे पानी का स्तर भी गिर रहा है और साथ ही वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा हूं क्योंकि वृक्ष हवा को शुद्ध करते हैं मगर जब वृक्ष ही नहीं रहेंगे तो हवा साफ और शुद्ध कैसे रहे गई। और दूसरी तरफ वाहनों से निकलने वाला धुआं यह भी लगातार वायु को प्रदूषित करता जा रहा है अगर हमें इस प्रदूषित वायु को फिर से शुद्ध करना है तो हमें ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगाने पड़ेंगे तभी हवा में फैली हुई गंदगी को साफ किया जा सकता है।अन्य प्रदूषणों की तुलना में वायु प्रदूषण का प्रभाव तत्काल दिखाई पड़ता है। वायु में यदि जहरीली गैस घुली हो तो वह तुरंत ही अपना प्रभाव दिखाती है और आस-पास के जीव-जंतुओं एवं मनुष्यों की जान ले लेती है। भोपाल गैस कांड इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। जल प्रदूषण का मुख्य कारण कारखानों से निकलने वाला गंदा पानी और हमारे द्वारा इधर उधर गंदगी को किसी नदी या नाले में डाल देना जिससे पानी अशुद्ध हो जाता है और पीने योग्य नहीं रहता साफ शब्दों में कहें तो जल प्रदूषित हो जाता है।

दूषित जल में रहने वाले जलीय जीवों और मनुष्य भी बीमार पड़ते हैं। अगर हम ध्वनि प्रदूषण की बात करें तो वह भी दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है शोर-शराबा इतना बढ़ चुका है कि इंसान शांति से कहीं भी बैठ नहीं सकता कहीं लाउडस्पीकर ओं की आवाज है तो कही पर वाहनों की गूज है ,लाउड स्पीकरों की कर्णभेदक ध्वनि ने बहरेपन और तनाव को जन्म दिया है। अंत में मैं यही कहूंगा कि हमें वास्तव में पर्यावरण दिवस को सफल बनाना है तो हमें पर्यावरण को साफ सुथरा और शुद्ध बनाना होगा भले वह जल हो,थल हो,ध्वनि हो या वायु हो हर चीज को हमें साफ-सुथरा और स्वच्छ रखने का संकल्प लेना। अगर आज हम पर्यावरण को लेकर जागरूक होंगे तो ही हम आने वाली पीढ़ी को भी जागरूक कर सकेंगे और उनको एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण प्रदान कर सकेगे।

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