मानवीय धर्म के हीरा-मोती

रावत गर्ग उण्डू, बाड़मेर, राजस्थान मानवीय धर्म के हीरे-मोती, सब रहते है हर गली-गली । ले लो तूम सेवा, दान

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बलिदान

आरती त्रिपाठी (मध्य प्रदेश) बलिदान हुए जो अपने वतन पर उनकी बलिदानी सदा अमर रहे जो भी आये तोड़ने देश

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कवि हृदय “हे हिन्द श्रेष्ठ”

अशोक राय वत्स, रैनी, मऊ (उत्तर प्रदेश) हे कवि हृदय , हे हिन्द श्रेष्ठ क्यों विदा हो गए, हमसे तुम?

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औरत

सुनैना अवस्थी, नई बस्ती (लखीमपुर खीरी) उ.प्र. गर हिम्मत हो बनकर देखो आसान नही औरत होना. काई पर पैर जमा

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पुण्यतिथि पर नेताजी सुभाष को नमन

विक्रम कुमार, मनोरा , वैशाली क्रांति की दिव्य ज्योत और वीरता के प्रकाश को आओ मिलकर नमन करें हम नेताजी

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दोहा-चौपाई सृजन

अर्चना लाल, जमशेदपुर (झारखंड) दुख का साया है घना , नहीं ठहरती बूंद । आँखें भी थकने लगी , लिया

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कालचक्र

विधा : “कुण्डलिया छन्द” बाबा बैद्यनाथ झा करते रहिए सर्वदा, सर्वांगीण विकास। मिले खुशी या दुख कभी, मत हों आप

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नीम

कुमारी अर्चना”बिट्टू” कटिहार,बिहार कड़वा बाहर को रहता मिठ्ठा आँगन में बसता बेला चमेली खुशबू देती घर को चंदन सा महकती!

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हरिगीतिका : चलें आसमां के पार

अवधेश कुमार आसुतोष आओ चलें हम आसमां के पार उस संसार में ईश्वर हमें देगा जहां हर चीज इक मनुहार

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परमानन्द

विधा : “कुण्डलिया छन्द” बाबा बैद्यनाथ झा चलती है सुख की घड़ी, मेरी प्रायः मन्द। दुख में भी रखकर खुशी,

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