प्रेमचंद जिनके रचनाओं के बिना हिंदी साहित्य अधूरा है…

निक्की शर्मा रश्मि, मुंबई प्रेमचंद जिनके बिना हिंदी साहित्य अधूरा है। पूस की रात, कफन, पंच परमेश्वर,बड़े भाई साहब,बूढ़ी काकी,दूध

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मुक्तक : शब्द

डॉ० धाराबल्लभ पांडेय ‘आलोक’, मकेड़ी अल्मोड़ा, उत्तराखंड भाव उमड़ते जो उर में तब, शब्द प्रस्फुटन होता है। पर व्यक्त न

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तुम शिव हो

मनु श्वेता, मुज़फ्फरनगर तुम शिव हो तुम सुंदर हो सत्य हो, शाश्वत हो सबके प्राणाधार हो। तुम वंदनीय तुम पूजनीय

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भारत मां तुझे ना भूलूंगा

रावत गर्ग उण्डू (नायब सुबेदार, सीसुब) बाड़मेर, राजस्थान मैं जग भूलूँगा लेकिन, माँ फर्ज कभी न भूलूँगा। मरकर भी में

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हिमादास के लिए

ललित शौर्य, पिथौरागढ़ तुम दौड़ना दौड़ती रहना अच्छा लगता है शायद तुम्हें दौड़ना कभी अखरता होगा तुम्हारा दौड़ना कइयों को

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अब्दुल कलाम के विचार आज भी प्रासांगिक

राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित” कवि, साहित्यकार हम केवल तभी याद किये जायेंगे जब हम हमारी युवा पीढ़ी को एक समृद्ध

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‘झूठेश्वर श्री सम्मान, ट्रंप चचा के नाम’

आशीष तिवारी निर्मल, लालगांव रीवा (मध्यप्रदेश) झूठे स्वर के धनी, अपने झूठे नामों और कारनामों को लेकर आये दिन विश्व

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बेरोजगार का इंटरव्यू

देवेन्द्रराज सुथार, जालोर, राजस्थान नौकरी और छोकरी वालों को इंटरव्यू देने के पश्चात अपेक्षित सफलताएं हासिल नहीं होने पर मैंने

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तन्हाई

आरती त्रिपाठी, जिला सीधी मध्यप्रदेश तन्हा रात के सीने पे तन्हा चाँद टहलता है जैसे आसमां आगोश में जमीं की

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सपनों के जख्म

आरती त्रिपाठी, सीधी (मध्यप्रदेश) कहाँ तुम सा कोई होता है कहाँ हम सा कोई मिलता है उजड़ जाते है कई

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